— अफीम नीति में किसानों के साथ धोखा, तुरंत संसोधन की मांग, नीमच—मंदसौर जिले के हजारों की संख्या में किसान हुए शामिल
नीमच। अफीम नीति 2026—27 में किसानों के साथ धोखा हुआ है। जिस उम्मीदों से किसान अफीम नीति का इंतजार कर रहे थे, लाखों किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अफीम नीति में तुरंत संसोधन किया जाए। सभी किसानों को 10—10 आरी के पट्टे दिए जाए। डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट की धाराओं से विमुक्त किया जाए। अफीम के 1 लाख रूपए प्रति किलो भाव, मार्फिन की मात्रा 3.7 किया जाने की मांग रखी गई। अफीम नीति में तुरंत संसोधन किया जाए।
यह बात मंदसौर जिले के मल्हारगढ विधानसभा क्षेत्र से किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने नीमच नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव के दौरान कही। वे शुक्रवार को नीमच राजस्व कॉलोनी में स्थित नारकोटिक्स कार्यालय में उपस्थित किसानों को संबोधित कर रहे थे। नीमच—मंदसौर जिले के किसान पहले नीमच शोरूम चौराहे पर एकत्रित हुए। यहां से दोपहर को पैदल रैली के रूप में अम्बेडकर मार्ग होते हुए, गोमाबाई रोड होते हुए नारकोटिक्स कार्यालय ( डीएनसी कार्यालय) पहुंचे। डीएनसी कार्यालय के बाहर गेट पर किसानों का प्रवेश रोक दिया गया और गेट पर ताला लगा दिया था। ऐसे में गेट के बाहर ही किसान नेता बैठ गए। डीएनसी निखिलकुमार गांधी से मिलने के लिए किसान नेता श्यामलाल जोचकंद अड गए। नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी महेंद्रसिंह बाहर आए और कहा कि डीएनसी सर बाहर है। आप में से पांच लोग एएनसी साहब से मिलने के लिए अंदर आ जाओ। जिस पर किसान नेता जोकचंद ने कहा कि एएनसी को बुलाओ। करीब तीन घंटे तक नारकोटिक्स कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहे। आलोट अजीत बोरासी ने कहा कि अफीम किसानों की मांग जायज है, अगर किसानों की मांगे नहीं मानी तो आलोट, रतलाम से हजारों की संख्या में किसान आएंगे। राजकुमार अहीर ने कहा कि किसानों की लडाई लडने के लिए हम तैयार है, यह अफीम नीति किसान विरोधी है। घंटो तक धरना प्रदर्शन के बाद एएनसी दफ्तर से बाहर निकलकर आए और ज्ञापन दिया गया। अफीम नीति में तुरंत बदलाव की मांग की गई। ज्ञापन का वाचन नीमच के पार्षद हरगोविंद दीवान ने किया। इस अवसर पर रूपल संचेती, मीना चौहान, कमलेश पटेल, बल्लू गुर्जर, दिनेश कारपेंटर, सुरेध धनगर, मुकेश कालरा, कूंजीलाल पाटीदार, मनोहर सोनी, कृष्णकांत माली, इशू धनगर, विष्णुप्रसाद दुबे, दिनेश पाटीदार, भगतराम डाबी, मुकेश पोरवाल सहित कई किसान प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन योगेश जोशी ने किया। आभार आशीष सुथार ने माना।
किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व में ये रखी मांगे—
1. मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा 3.7 की जाए :-
वर्तमान अफीम नीति में मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा 4.2 से बढ़ाकर 4.4 किए जाने के कारण अनेक किसान प्रभावित हुए हैं। इससे कई किसानों के पुराने चीरे वाले पट्टे समाप्त कर उन्हें पांच आरी के सीपीएस पट्टों में परिवर्तित कर दिया गया है। यह किसानों के साथ धोखा है। अतः किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा में संशोधन कर इसे 3.7 किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
2. सीपीएस पद्धति के किसानों को उचित राहत दी जाए :-
सीपीएस पद्धति के अंतर्गत आने वाले किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए। किसानों के अनुसार, 90 किलोग्राम से अधिक औसत डोडा उत्पादन देने वाले किसानों को भी केवल पांच आरी के पट्टे दिए गए हैं, जो किसानों के साथ अन्याय है। जबकि हर वर्ष 90 की औसत देने वाले किसान को 10 आरी का चीरा लगाने के लिए पट्टा दिया जाता है। पिछले वर्ष 90 से उपर औसत देने वालों को भी 5 आरी का पट्टा जारी कर धोखा किया गया।
3. वर्ष 1997-98 से लगाकर अभी तक पात्र किसानों को पट्टे दिए जाएं तथा नए लाइसेंस जारी हों :- वर्ष 1997-98 से लगाकर अभी तक पात्र किसानों को अफीम पट्टे प्रदान करने की मांग लंबे समय से लंबित है। ऐसे किसानों के प्रकरणों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें नियमानुसार पट्टे दिए जाएं। साथ ही, नए पात्र किसानों को अफीम की खेती से जोड़ने के लिए नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, जिससे किसानों को न्याय मिल सके।
4. अफीम का भाव बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए :-
वर्तमान समय में खेती की लागत, श्रमिकों की मजदूरी, कृषि उपकरणों, खाद, दवाई, बिजली एवं अन्य आवश्यक संसाधनों पर होने वाले खर्च में वृद्धि हुई है। ऐसे में अफीम उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना आवश्यक है। अतः अफीम का खरीद मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
5. डोडाचूरा के संबंध में एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए :-
डोडाचूरा के संबंध में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 एवं 8/29 को हटाने की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए। डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 00.2 प्रतिशत से कम है। एसे में डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट से बाहर किया जाए। क्योंकि वर्तमान में मंदसौर, नीमच, रतलाम, उज्जैन, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ की जेलों में हजारों किसान डोडाचूरा प्रकरणों में बंद होकर सजा काट रहे हैं। हजारों किसानों के केस कोर्ट में लंबित हैं।
6. प्राकृतिक आपदा के चलते काटे गए पट्टों को सीपीएस में डालने पर पुनर्विचार किया जाए :- प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि के चलते कई किसानों की फसल खराब हो गई थी। ऐसी फसल को नारकोटिक्स विभाग की मौजूदगी में नष्ट कराया था। इसके बावजूद विभाग ने उक्त पट्टों को सीपीएस में डाल दिया। इस पर पुनर्विचार कर उक्त पट्टों को बहाल किया जाकर चीरा वाला पट्टा प्रदान किया जाए।