जी.बी.एस. बीमारी से डरे नही, लक्षणों के प्रति जागरूक रहें: मध्यप्रदेश के नीमच कलेक्टर हिंमाशु चंद्रा ने जारी की अपील
  • Reporter : dashpur live desk
  • Updated on: January 16, 2026, 6:06 pm

— मध्यप्रदेश के नीमच कलेक्टर हिंमाशु चंद्रा ने जारी की अपील: समय पर लक्षणों के पहचान से इलाज संभव, शंका होने पर निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में सम्पर्क करें


मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा में जीबीएस बीमारी से दो बच्चों की मौत और आठ मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

नीमच कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा ने स्वास्थ्य एडवाईजरी जारी करते हुए बताया, कि विगत कुछ दिनो से जिले के मनासा क्षेत्र में जी.बी.एस. (गिलीयन बार्रे सिंड्रोम) के लक्षणों वाले कुछ मरीज संज्ञान में आने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के दल द्वारा घर-घर जाकर लक्षणों वाले बच्चों एवं व्‍यस्कों को चिन्हि‍त किया जाकर, उनका समुचित उपचार किया जा रहा है। कलेक्‍टर ने कहा, कि जिले के मनासा क्षेत्र में कुछ बच्‍चों में बुखार के साथ मांसपेशियों में कमजोरी की जानकारी एवं सूचना मिली थी, सूचना के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कालेज एवं महिला बाल विकास विभाग का संयुक्त दल गठित कर मनासा नगर में घर-घर सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे में जिन बच्चों या व्यस्क में लक्षण मिले है, उनका सैंपल लिया जा रहा है तथा स्थानीय उपचार प्रदान किया जा रहा है, आवश्‍यकता होने पर रैफर भी किया जावेगा।
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर.के.खद्योत ने बताया, कि जी.बी.एस. सिंड्रोम एक ऑटो इम्युन बीमारी है, जो अक्सर वायरल बुखार के साथ आ सकती है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही नसों पर हमला करती है और व्यक्ति के शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है। साथ ही अचानक कमजोरी आना, हाथ, पैरों में सून्नपन होना, चलने में या सीढियां चढंने में परेशानी होना, बोलने या निगलने में, सांस लेने में तकलीफ होना भी इस बीमारी के लक्षण हो सकते है।
    डॉ.खद्योत ने आमजन से अपील की है, कि यह बिमारी संक्रामक नहीं है अर्थात एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है, इसलिये व्यक्ति की देखभाल करने में कोई समस्या नही है। बीमारी से बचने के लिये भोजन पूर्ण पकाकर ही खाए, अधपका भोजन नही खाए, पानी को सदैव उबालकर ही पीये, पानी का क्लोरिनेशन करें या क्लोरिन टेबलेट से उपचारित पानी का उपयोग करे, खाना खाने तथा पकाने से पहले तथा शौच से आने के बाद साबुन से हाथ धोए, पशुओं को छूने के बाद, चारा खिलाने के बाद भी अच्छे से हाथ धोना सुनिश्चित करे। 
     डॉ. खद्योत ने बताया, कि उक्त बिमारी में उपचार के लिए जिले में समुचित व्यवस्था उपलब्ध है तथा आवश्‍यकता पड़ने पर मेडिकल कॉलेज में भी उपचार की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।
     कलेक्टर  हिमांशु चन्द्रा ने जिले के आमजन से अपील की है, कि उनकी जानकारी में इस प्रकार के लक्षण वाला कोई मरीज आता है, तो तत्काल उसे निकट के स्वास्थ्य केन्द्र पर ले जाकर, चिकित्सक को दिखाए तथा समुचित उपचार प्राप्त करे तथा बीमारी से बचने के लिये सावधानी रखे।

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